Tuesday, January 4, 2011

मैंने भी कुछ पूंछा नहीं और उन्होंने तो बताना ही नहीं था

सेना एक अनुशाशन प्रिय संगठन है और यहाँ किसी भी तरह की कि गलती की भारी सजा का प्रावधान है ....महिलाओं को सेना में हमेशा से से विशेष सम्मान दिया गया है , अगर आप आर्मी ला को ध्यान से पढ़ें तो पायेंगे की महिलाओं के साथ अभद्रता की कड़ी सजाएं सेना के कानून में है .....और कई अवसरों पर तो मैंने इनका कठोरता से पालन होते हुए भी देखा है .....मगर एक बात जो हमेशा से मुझे चिंतित करती आई है वो है सेना की बिगडती छवि ....अभी तक सेना की छवि जिन दो बातों गन्दी हुई है है वे हैं - महिला उत्पीडन और भ्रष्टाचार ! गौर करने वाली बात यह है कि आखिर सेना जिन बातों का हमेशा से डंका पीटती आई है वे बाते ही हमेशा उसकी शर्मिन्दगी का विषय बनती रही हैं ...अगर सेना इस बात का खुलासा करे कि आखिर उसके कितने अधिकारी और जवान पिछले ६० वर्षों में सिर्फ इस बात के लिए निलंबित किये गए है कि उन्होंने किसी महिला के साथ रेप किया या दूसरी तरह की अभद्रता की तो यह जान कर आश्चर्य ही होगा की सेना का यह आचरण एक दिखावा मात्र ही है ............महिलाओं के सम्मान के बारे में सेना की कथनी और करनी में एक बड़ा अंतर है . सेना इस बारे में कई बार विचार कर चुकी है और नियमों में व्यापक सुधार भी हुए हैं ..... मै तो मानता हूँ की सेना के द्वारा उठाये गए कदम काफी हद तक कारगर भी रहे है और इस तरह के केसेस में लगातार कमी आई है
..............फिर आखिर हमें क्यूँ आये दिन ये सुनने को मिलता है कि फलां जगह एक जवान ने किसी लडकी का रेप कर दिया या फला अधिकारी पर उसकी जूनियर ने यौन शोषण का आरोप लगाया ..ये आरोप कई बार सही होते है तो कई बार बेबुनियाद भी साबित होते है ...और दोनों ही बातों से हम ऐसा कोई निष्कर्ष नहीं निकाल सकते की सारे आरोप सही होते है या कि सारे आरोप बेनुनियाद होते है ...पर दुःख तो तब होता है जब किसी को दी गयी विशेष सुविधा का कोई लाभ उठाता है ...मै एयरफ़ोर्स के अबने व्यक्तिगत अनुभव के आधार पर भी कह सकता हूँ कि आज महिलाओं को दिए गए विशेषाधिकार का वे भरपूर दुरपयोग कर रही हैं ...मै कई अधिकारियों को सिर्फ इस भय में जीते देखा है कि कब कोई महिला अधिकारी उनपर यौन शोषण का आरोप लगा दे और वे बदनामी के साथ साथ नौकरी से भी हाँथ धो बैठे ...ऐसा लगता है ये अधिकार अब सिर्फ साधनों की पूर्ती के लिए ही प्रयोग किये जाने लगे है , आपको एक वाकया सुनाता हूँ ....भारतीय वायुसेना में महिलाओं का एक अलग ग्रुप है जिसे अफवा (AFAWA)- Airforce Wife's Welfare Association कहते है ....अब हुआ यूँ की पतिदेव महोदय ने दारू के नशे में सिविलियंस के साथ मारपीट की और बाद में पास के ही थाणे में पीट कर बंद कर दए गए. कमांडिंग ऑफिसर ने भी महोदय के खिलाफ कार्यवाही की संस्तुति कर दी ...मगर उनकी मजाल की वो कुछ कर पाते ...अफवा की महिला मेम्बरों ने जमीन सर पर कड़ी कर दी ...बस फ़ौज के इतने बड़े अधिकारी नतमस्तक हो गए उनके आगे ....अपने प्रभाव से छुड़ाना पड़ा महोदय को ... खैर ने तो उन महोदय की रोज की बात है ...पर सब ठीक चल रहा है ..पत्नी उनकी काफी हंगामेदार है ..संगठन में अच्छी पकड़ है उनकी ..सो चल रहा है उनका
अब ये तो उदाहरण है उनकी पत्नी के प्रभाव का ....मगर वहां एक एकलौती अकेली बेचारी महिला अधिकारी थीं ...मैंने कभी भी उन्हें काम करते नहीं देखा ...उनकी छुट्टी कभी कैंसल नहीं हुई ..एक बार सुनने में आया कि उन्होंने कोई शोषण वोषण का आरोप लगाया था ...रात भर में ही बात निकल पड़ी थी और बात निकली तो इतनी दूर तक गयी कि बस पूंछो मत ....कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक और इस्टर्न से लेकर वेस्टर्न कमांड तक हर जगह से मेरे पास फोन आने लगे .....मुझे भी तब ही पता चला कि कुछ हुआ है यूनिट में ...सबेरा होने पर सभी खुश थे की अब उस अधिकारी का तो काम तमाम हो जाएगा ....सबकी छुट्टियाँ अब आसानी से साईन हो जाया करेंगीं ...पर सबेरा हुआ तो पता चला कि मैडम ने अपने आरोप विडड्रा कर लिए है ...मैडम को एक महीने की कैसुअल लीव भी मिल गयी है और मैडम कि स्पेशल ड्राप की भी व्यवस्था भी हो गयी है स्टेशन तक ......बस मै भी उसी ड्राप में उनके साथ आया मगर सौभाग्य से मेरी और उनकी ट्रेन अलग अलग थीं ...मैंने भी कुछ पूंछा नहीं और उन्होंने तो बताना ही नहीं था ......तब से मै समझ गया कि टेढ़ी अंगुली से घी निकालना क्या होता है

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