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Tuesday, February 22, 2011

आखिरी अलविदा


मच्छरों के दल में उस दिन एक खुशी की लहर दौड़ी जिस दिन मच्छरों की केमिकल लैबोरेटरी ने एक ऐसा रसायन तैयार कर लिया जिससे जानसन की मौत तय थी। मच्छरों के प्रधानमंत्री मास्कू ने इस रसायन को खुद ही जानसन के शरीर में पहुंचाने का जिम्मा लिया।
           आमतौर पर जैसा होता है कि आदमी को मच्छर अपना दुश्मन समझता है, बिल्कुल वैसा यहां पर नहीं था। कुछ मच्छर उस इंसान को अपना दोस्त भी मान लेते, मगर यहां बात उनकी जिन्दगी की आ गई थी। वैसे आमतौर पर नर मच्छरों को इनसे कोई मतलब नहीं होता है। नर मच्छर तो केवल फूल पत्तियों के रस से जीवन निर्वाह कर लेते हैं।मानव जाति के किये गये किसी भी बड़े उलटफेर से उनका वास्ता बहुत कम बार ही पड़ता है। मगर इस बार मिस्टर जानसन के खिलाफ सारे मच्छर एकजुट थे। मिस्टर जानसन (मच्छरों के लिए सिर्फ जानसन), के खून में एक अजीब सा रसायन था। उनको जिस मच्छर ने काटा वह तुरन्त मौत के घाट उतर गया। छुटपन से ही जानसन ने यह रसायन सक्रिय हो गया था और यही कारण था कि जानसन का नाम मच्छर बिरादारी में बड़ी घृणा के साथ लिया जाता था। जानसन को सबक सिखाने के लिए न जाने कितने क्रांतिकारी मच्छर शहीद हो गये थे और न जाने कितने ही सक्रिय थे। उनकी मीडिया में आये दिन जानसन से सम्बन्धित लेख और सम्पादकीय निकलती रहती थी। उनमें जानसन को मच्छर जाति का विरोधी, क्रूर, सीरियल किलर और इस तरह की कई उपाधियों से नवाजा जाता और इसको पढ़ लेने के बाद नये मच्छरों का खून उबल जाता। प्रौढ़ मच्छर पहले से ज्यादा सतर्क हो गये थे और यही कारण था कि कुछ क्रान्तिकारी और सुसाइड केस मच्छरों को छोड़ कोई भी मच्छर मिस्टर जानसन के इर्द गिर्द नहीं घूमता था।


image by:- art365.joeuser.com

    मिस्टर जानसन बिल्कुल वैसे नहीं थे जैसा कि मच्छरों के साहित्य में वर्णित था। वे तो बेहद ही नेकदिल और अहिंसा परस्त व्यक्ति थे। जब से उन्हें यह बात मालूम पड़ी थी कि उनका खून मच्छरों के लिए मौत का पैगाम लेकर आया है वे खुद को अधिक ढ़का हुआ रखते थे। दिन में लम्बा सा ओवरकोट पहनते थे। गले का कालर भी उठाकर रखते थे और ज्यादातर सिर ढका रखते थे। उन्हें अपनी इस असाधारणता पर दुख भी होता था और इसके लिए वह तरह-तरह के इलाज भी करा चुके थे। वह लगातार ऐसा करते रहे और तब तक किया जब तक कि उनको दवाईयों से इफेंक्शन नहीं हो गया। अब खुद को बचाकर रखना ही उसका उपाय था और वह अक्सर ऐसा ही करते थे। वे तब बहुत दुखी हो जाया करते जबकि इतने बचाव के बाद भी कोई न कोई मच्छर मर जाता। रात में वह मच्छरदानी लगाते थे और प्रयास करते कि कोई मच्छर उन्हें काटने न पाये।
    इधर मच्छरों का क्रोध जानसन पर दिन पर दिन बढ़ता ही जा रहा था। मच्छरों को यह विश्वास हो चला था कि जानसन मच्छर जाति को खत्म कर देना चाहता है। अब तक मच्छरों के कई बड़े और कर्मठ नेता भी मिस्टर जानसन का शिकार हो चुके थे और मच्छरो ने जानसन को ठिकाने लगाने की अपनी योजना पर काम भी शुरू कर दिया था। मच्छरों के दल में उस दिन एक खुशी की लहर दौड़ी जिस दिन मच्छरों की केमिकल लैबोरेटरी ने एक ऐसा रसायन तैयार कर लिया जिससे जानसन की मौत तय थी। मच्छरों के प्रधानमंत्री मास्कू ने इस रसायन को खुद ही जानसन के शरीर में पहुंचाने का जिम्मा लिया। मगर यह खुशी तब शोक में बदल गयी जब उस रसायन को पीते ही प्रधानमंत्री मास्कू की घटनास्थल पर ही मौत हो गई। जनता ने लैबोरेट्री पर पथराव कर उसे बन्द कर दिया और जानसन पर किया जा रहा शोध रोक देना पड़ा। प्रधानमंत्री की मौत से मच्छर समुदाय का खून उबल पड़ा। जानसन बच्चों का भी बिलेन बन गया। जानसन पर कई बड़ी फिल्में सुपरहिट रहीं जिनमें मशहूर विलेन जिमी, टाफू और सिनी ने जानसन का रोल किया। मच्छरों के बीच आये दिन जानसन का पुतला फूंका जाता और धरना प्रदर्शन होता। सरकार पर लगातार जानसन को मारने का दबाव बढ़ता जा रहा था। विपक्ष के हंगामें का एकमात्र विषय जानसन बन गया था।
इसी बीच अखबारों में एक अफ्रीकन मच्छर लिली के आने के खबर प्रकाशित हुई। इस स्टिंग आपरेशन के बाद पुलिस का ध्यान लिली पर पड़ा और उसे गिरफ्तार कर लिया गया। अगने दिन की कोर्ट कार्यवाही के बाद उसे रिमाण्ड पर ले लिया गया। लिली से पुलिस ने कड़ी पूछतांछ की और पाया कि लिली अफ्रीकी देश जारा से आई है। उसकी लम्बी यात्रा का कारण उसकी एक असाधारण ताकत है। लिली को तुरन्त सरकार की कैबिनेट के समक्ष प्रस्तुत किया गया। कैबिनेट ने बातचीत के बाद लिली को इस शर्त पर छोड़ना चाहा कि वह मिस्टर जानसन को मारे। लिली ने जानसन वाली बात मानने से इंकार कर दिया। लिली पर जासूसी का मुकद्मा चलाया गया और जैसा कि मच्छर कानून में जासूसी के लिए मृत्युदण्ड वर्णित था लिली को दिया गया। अब अगले दिन लिली को मौत लगे लगाना ही था।
    सरकार इस मौके को जाने देना नहीं चाहती थी इसलिए तत्कालीन मच्छर प्रधानमंत्री राना जेन स्वयं उससे मिलने पहुंचे। प्रधानमंत्री को देखते ही लिली ने झुककर सलाम किया। प्रधानमंत्री ने उसे बताया कि अगर वह जानसन वाली बात मान ले तो उसकी सजा माफ हो सकती है और वह इनाम की हकदार भी हो सकती है। मगर लिली अपनी जान बचाने के लिए किसी निर्दोष की हत्या करने को तैयार नहीं थी। उसे जब यह मालूम पड़ा कि जानसन एक हत्यारा है तो उसने अपनी शक्ति का इस्तेमाल करने का मन बना लिया।
    मच्छर समुदाय के बच्चे-बच्चे तक यह बात पहुंच गई कि अब जानसन की मौत तय है और सभी इस बार पहले से कहीं अधिक सतर्क दिखाई दे रहे थे। लिली को रिहा कर दिया गया और उसे इस काम के लिए एक महीने का समय दिया गया। जानसन इन बातों से बिल्कुल बेखबर था और अपनी दैनिक दिनचर्या को व्यवस्थित बनाता हुआ जी रहा था। सुबह से शाम तक अपने शरीर को ढके रखने में ही उसका ध्यान रहता था और इसी वजह से लिली को काम को अंजाम देने का मौका नहीं मिल पाया था। एक दिन मिस्टर जानसन अपनी मच्छरदानी में आराम से लेटे हुए थे और नींद लेने के करीब पहुंचे ही थे कि एक मच्छर की गूंज उनके कानों में सुनाई दी। वह झटके से दूर हो गये और उस मच्छर से न काटने का आग्रह किया। लिली ने बताया कि वह कई दिनों की भूखी है और वह उसे काटकर अपना पेट भरना चाहती है। जानसन ने हंसते हुए बताया कि ऐसे तो वह अपना पेट फाड़ लेगी और मौत को गले लगा लेगी। जानसन ने लिली को भोजन दिया और बाद में कुछ फलों का रस और बियर का आनन्द भी।  उस दिन लिली ने भरपेट खाना खाया। खाने के बाद लिली ने जानसन को काटने का मन बदल दिया। लिली ने जानसन को कई सारे गाने सुनाये और जानसन ने भी लिली को दुनिया की तमाम अजीब दस्तानें बतायीं। फिर दोनों ने अपनी-अपनी यात्राओं का बढ़ा-चढ़ा कर रोचक ढंग से वर्णन किया और वे अच्छे दोस्त बन गये। अब लिली और जानसन अधिकतर मिल लिया करते। जानसन जब भी आफिस जाता लिली भी उसके साथ होती। अक्सर ठण्ड में वह उसके ओवरकोट में छिपी रहती और फुर्सत मिलते ही बाहर निकलकर जानसन से बातें करती। कुछ ही दिनों में जानसन और लिली एक दूसरे की जिन्दगी का हिस्सा बन गये। अगर जानसन कभी बीमार पड़ जाता तो लिली उसका ख्याल रखती और जानसन भी लिली को उतना ही चाहता। जानसन तो कुछ दिनों में ही सही हो गया मगर लिली इस बीच कुछ परेशान रहा करती। उस पर आये दिन दबाव बढ़ता जा रहा था। कैबिनेट ने उसे कई बार दफ्तर तलब किया और मंत्रालय लगातार उस पर निगरानी बनाये हुये था। मीडिया भी लिली को लेकर तमाम अटकलें लगा रहा था। इधर कई दिनों से तंग आकर लिली ने अखबार पढ़ना छोड़ दिया था। वह उदास रहा करती थी। जानसन के पूछने पर वह हर बात को टाल जाती। जानसन इस उदासी के बीच लिली को खुश करने की भरपूर कोशिश करता मगर लिली और दुखी हो जाती। वह बस इतना कहती कि वे ज्यादा दिनों तक साथ नहीं रह सकते। जानसन यह सुनकर दुखी हो जाता और सोचता कि लिली को ऐसा क्यूं लगता है। लिली पर वह कभी दबाव नहीं बना पाता और लिली हमेशा उसकी इस बात को टाल जाती। अब लिली के पास एक दिन और था। लिली ने यह बात जानसन को बताई। जानसन ने लिली को सबसे अच्छे होटल का खाना खिलाया, दोनों ने साथ-साथ शराब पी और जानसन ने अपनी सबसे पहली वाली प्रेयसी के बारे में लिली को बताया। उसने यह भी बताया कि वह लिली को कितना प्यार करता है। अगले दिन की सुबह लिली जल्दी उठ गई। उसने जानसन को आखिरी गुड मार्निंग कहीं और बताया कि इसके बाद कोई लिली उसे गुड मार्निंग नहीं कहेगी। लिली और जानसन ने मिलकर आंसू बहाये और फिर लिली ने जानसन को काट लिया। जानसन को इस बात का पता नहीं चल पाया। उसे लिली से आग्रह किया कि वह उसे यह बताये कि वे आखिर क्यूं नहीं मिल सकते।
    लिली पूरी तरह टूट चुकी थी। उसने जानसन से कहा कि वह उसे माफ कर दे। अगले पांच मिनट बाद वे एक दूसरे से जुदा हो जायेंगे। उसने बताया कि वह एक अद्भुद शक्ति की मालिका है। वह जिस भी इंसान को काट लेती है, उसकी कुछ मिनटों में ही मौत हो जाती है। फिर वह इंसान केवल इसी शर्त पर बच सकता है कि लिली उसे दोबारा काटे। उसने बताया कि अफ्रीका में उसने कई लोगों का काटा था। उसे ऐसा नहीं मालूम था और लोगों की जाने लगतार जा रही थीं। मनुष्यों का जब इस बात का पता चला तो वह मच्छर जाति से घृणा करने लगे। वहां मनुष्यों ने बड़े स्तर पर मच्छरों का विनाश कर डाला। कई करोड़ मच्छर मारे गये और समूची मच्छर जाति पर संकट आ गया। उसे अफ्रीका छोड़ देना पड़ और वह यहां आ गई।
    जानसन इस बात को बड़ी गम्भीरता से सुन रहा था और यह समझने की कोशिश कर रहा था कि इन बातों का लिली के जाने से क्या सम्बन्ध है। क्या अफ्रीकी मच्छरों ने उसे वापस बुला लिया है या लिली अपने परिवार से मिलने के लिए जबरन अफ्रीका में घुसना चाहती है। तभी लिली की एक बात ने उसका ध्यान भंग कर दिया। उसने बताया कि वह उसे काट चुकी है। जानसन यह सुनकर डर गया। उसे लाग कि उसका सिर घूम रहा है और उसके सामने अंधेरा छा गया। उसको अपनी दोस्ती की इतनी भयानक सजा मिलने वाली थी उसने नहीं सोचा था। उसको लिली पर बहुत गुस्सा आ रहा था। वह लिली को मार देना चाहता था। मगर उसके प्यार ने उसे ऐसा न करने पर मजबूर कर दिया था। लिली बोलती जा रही थी। वह कह रही थी कि वापस आने पर उसे पकड़ लिया गया और उसे मृत्युदण्ड हो गया। उसने बताया कि आज उसे मारने पर बहुत सारा इनाम मिलेगा। वह यहां की कैबिनेट में मंत्री बना दी जायेगी और सरकारी सुविधायें और ठाठ बाट उसे मुहैया हो जायेंगे।
    इतना बोलते-बोलते लिली गिर पड़ी। अब वह उड़ नही पा रही थी। जानस ने उसे हाथ पर उठा लिया। लिली ने जानसन के फीके चेहरे की ओर देखा और फिर मुस्कराई, ‘‘जानसन, मेरे प्यारे जानसन, यह सब मैंने मच्छरों की भलाई के लिए किया। मुझे माफ कर देना जानसन। वैसे एक बात बोलूं जानसन, मैंने तुम्हारा सारा जहर चूस लिया है। अब मच्छरों को तुमसे कोई खतरा नहीं है। दरअसल मैंने तुम्हें दोबारा काटा था। अब तुम एक आम आदमी हो जानसन। अलविदा, आखिरी अलविदा! दुनिया के सबसे प्यारे इंसान को लिली का आखिरी अलविदा।’’


By 
Alok Dixit

                                                                                                                                                                  
                                                                                      

Saturday, February 19, 2011

टुनिशिया, मिस्र और यमन, अल्जीरिया के आगे पार्ट-2...लीबिया, बहरीन, तुर्की और जार्डन

उत्तर भारत के गावों में एक कहावत कही जाती है- "बुढ़िया के मरने का डर नहीं है, डर तो इस बात का है कि यम परक # जायेंगे' . टुनिशिया, और मिस्र की क्रांतियों से लगता है मानो  अफ्रीका में यम परक गए हो !
 यमन में अठारह दिनों तक चले संघर्ष के बाद जिस तरह से मोनार्ची का अंत हुआ है उससे समूचे अफ्रीका में भूचाल आ गया है. पड़ोसी देशों में भी इस बात को लेकर ये आशा जगी है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनों से तख्ता पलट किया जा सकता है . प्रदर्शनों की जो शुरूआत पिछले दिनों यमन और अल्जीरिया से हुई वो भले ही तत्काल कोई असर नहीं छोड़ पायी मगर उसका असर अब बहरीन, लीबिया, जार्डन और तुर्की में देखने को मिल रहा है.
 पिछले तीन दिनों में ही तुर्की में लगभग सौ लोगों की मौत हो चुकी है और प्रदर्शन तेज होता जा रहा है. बहरीन में भी परिस्थितियाँ बेकाबू है जहाँ शुक्रवार को नमाज के बाद लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा और सेना को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े. यमन में पहले ही दबाव में आकर 30 सालों से सत्ता में बैठे  प्रेसीडेन्ट अली अब्दुल्ला सालेह ने २०१३ में गद्दी छोड़ देना का ऐलान कर दिया है . जार्डन में भी राष्ट्रपति शाह अब्दुल्ला द्वितीय की शक्तियों को सीमित करने की मांग जोरों से उठ रही है. तुर्की में देशद्रोह के आरोपों में उम्रकैद की सजा झेल रहे अब्दुल्ला की रिहाई की मांग जोर पकडती जा रही है . यही हाल लीबिया का भी है. वहां कर्नल मोहम्मद गद्दाफी की ४० सालों की हुकूमत से लोग त्रस्त आ गए हैं.





 ट्यूनीशिया में मरी बुढ़िया से सारे अफ्रीका में यमों की आवाजाही तेज हो गयी है , देखना होगा कि अरब में कितनी बुढ़िया मरती हैं और यम अफ्रीका से रास्ता बदल कर इरान, अफगानिस्तान और पकिस्तान होते हुए चाइना तक पहुँचते है या नहीं ?




आलोक दीक्षित 
07499219770
09651411891
# ( Its not the matter that Grand mother died, the matter is that Yamraj will know this place).

Saturday, January 22, 2011

गौरव सोलंकी कहानी

तुम्हारी बाँहों में मछलियाँ क्यों नहीं हैं और नॉस्टेल्जिया

मेरा मन है कि मैं उसे कहानी सुनाऊँ। मैं सबसे अच्छी कहानी सोचता हूं और फिर कहीं रखकर भूल जाता हूं। उसे भी मेरे बालों के साथ कम होती याददाश्त की आदत पड़ चुकी है। वह महज़ मुस्कुराती है।

फिर उसका मन करता है कि वह मेरे दाएँ कंधे से बात करे। वह उसके कान में कुछ कहती है और दोनों हँस पड़ते हैं। उसके कंधों तक बादल हैं। मैं उसके कंधों से नीचे नहीं देख पाता।

- सुप्रिया कहती है कि रोहित की बाँहों में मछलियाँ हैं। बाँहों में मछलियाँ कैसे होती हैं? बिना पानी के मरती नहीं?

मैं मुस्कुरा देता हूं। मुस्कुराने के आखिरी क्षण में मुझे कहानी याद आ जाती है। वह कहती है कि उसे चाय पीनी है। मैं चाय बनाना सीख लेता हूं और बनाने लगता हूं। चीनी ख़त्म हो जाती है और वह पीती है तो मुझे भी ऐसा लगता है कि चीनी ख़त्म नहीं हुई थी। मैं सबसे अच्छी कहानी सोचता हूं और फिर कहीं रखकर भूल जाता हूं। उसे भी मेरे बालों के साथ कम होती याददाश्त की आदत पड़ चुकी है। वह महज़ मुस्कुराती है।

- तुम्हारी बाँहों में मछलियाँ क्यों नहीं हैं?

- मुझे तुम्हारे कंधों से नीचे देखना है।

- कहानी कब सुनाओगे?

- तुम्हें कैसे पता कि मुझे कहानी सुनानी है?

- चाय में लिखा है।

- अपनी पहली प्रेमिका की कहानी सुनाऊँ?

- नहीं, दूसरी की।

- मिट्टी के कंगूरों पर बैठे लड़के की कहानी सुनाऊँ?

- नहीं, छोटी साइकिल चलाने वाली बच्ची की। और कंगूरे क्या होते हैं?

- तुम सवाल बहुत पूछती हो।

वह नाराज़ हो जाती है। उसे याद आता है कि उसे पाँच बजे से पहले बैंक में पहुँचना है। ऐसा याद आते ही बजे हुए पाँच लौटकर साढ़े चार हो जाते हैं। मुझे घड़ी पर बहुत गुस्सा आता है। मैं उसके जाते ही सबसे पहले घड़ी को तोड़ूंगा।

मैं पूछता हूं, "सुप्रिया और रोहित के बीच क्या चल रहा है?"

- मुझे नहीं पता...

मैं जानता हूं कि उसे पता है। उसे लगता है कि बैंक बन्द हो गया है। वह नहीं जाती। मैं घड़ी को पुचकारता हूँ। फिर मैं उसे एक महल की कहानी सुनाने लगता हूं। वह कहती है कि उसे क्रिकेट मैच की कहानी सुननी है। मैं कहता हूं कि मुझे फ़िल्म देखनी है। वह पूछती है, "कौनसी?"

मुझे नाम बताने में शर्म आती है। वह नाम बोलती है तो मैं हाँ भर देता हूं। मेरे गाल लाल हो गए हैं।

उसके बालों में शोर है, उसके चेहरे पर उदासी है, उसकी गर्दन पर तिल है, उसके कंधों तक बादल हैं।

- कंगूरे क्या होते हैं?

अबकी बार वह मेरे कंधों से पूछती है और उत्तर नहीं मिलता तो उनका चेहरा झिंझोड़ने लगती है।

मैं पूछता हूं - तुम्हें तैरना आता है? वह कहती है कि उसे डूबना आता है।

मैं पूछता हूं - तुम्हें तैरना आता है?

वह कहती है कि उसे डूबना आता है।

और मैं आखिर कह ही देता हूं कि मुझे घर की याद आ रही है, उस छोटे से रेतीले कस्बे की याद आ रही है। मैं फिर से जन्म लेकर उसी घर में बड़ा होना चाहता हूं। नहीं, बड़ा नहीं होना चाहता, उसी घर में बच्चा होकर रहना चाहता हूं।

मुझे इतवार की शाम की चार बजे वाली फ़िल्म भी बहुत याद आती है। मुझे लोकसभा में वाजपेयी का भाषण भी बहुत याद आता है। मुझे हिन्दी में छपने वाली सर्वोत्तम बहुत याद आती है, उसकी याद में रोने का मन भी करता है।

उसमें छपी ब्रायन लारा की जीवनी बहुत याद आती है। गर्मियों की बिना बिजली की दोपहर और काली आँधी बहुत याद आती है। वे आँधियाँ भी याद आती हैं, जो मैंने नहीं देखी लेकिन जो सुनते थे कि आदमियों को भी उड़ा कर ले जाती थी। अंग्रेज़ी की किताब की एक पोस्टमास्टर वाली कहानी बहुत याद आती है, जिसका नाम भी नहीं याद कि ढूंढ़ सकूं। मुझे गाँव के स्कूल का पहली क्लास वाला एक दोस्त याद आता है, जिसका नाम भी याद नहीं और कस्बे के स्कूल का एक दोस्त याद आता है, जिसका नाम याद है, लेकिन गाँव नहीं याद। वह होस्टल में रहता था। उसने 'ड्रैकुला' देखकर उसकी कहानी मुझे सुनाई थी। उसकी शादी भी हो गई होगी...शायद बच्चे भी। वह अब भी वही हिन्दी अख़बार पढ़ता होगा, अब भी बोलते हुए आँखें तेजी से झिपझिपाता होगा।

लड़कियों के होस्टल की छत पर रात में आने वाले भूतों की कहानियाँ भी याद आती हैं। दस दस रुपए की शर्त पर दो दिन तक खेले गए मैच याद आते हैं। शनिवार की शाम का 'एक से बढ़कर एक' याद आता है, सुनील शेट्टी का 'क्या अदा क्या जलवे तेरे पारो' याद आता है। शंभूदयाल सर बहुत याद आते हैं। उन्होंने मुझसे कहा था कि तुम क्रिएटिव हो और मैं उसका मतलब जाने बिना ही खुश हो गया था। एक रद्दीवाला बूढ़ा याद आता है, जो रोज़ आकर रद्दी माँगने लगता था और मना करने पर डाँटता भी था। कहीं मर खप गया होगा अब तो।

वह कंगूरे भूल गई है और मेरे लिए डिस्प्रिन ले आई है। उसने बादल उतार दिए हैं। मैंने उन्हें संभालकर रख लिया है। बादलों से पानी लेकर मेरी बाँहों में मछलियाँ तैरने लगी हैं। हमने दीवार तोड़ दी है और उस पार के गाँव में चले गए हैं।

कुछ देर बाद वह कहती है – मिट्टी के कंगूरों पर बैठे लड़के की कहानी सुनाओ।

मैं कहता हूं कि छोटी साइकिल चलाने वाली लड़की की सुनाऊँगा। वह पूछती है कि तुम्हें कौनसी कहानी सबसे ज़्यादा पसन्द है?

मैं नहीं बताता।

गौरव सोलंकी

(ब्लॉगिंग की दुनिया में सक्रिय गौरव सोलंकी एक आई टी कंपनी में कार्यरत हैं.)

Friday, January 7, 2011

........चींटी

सुमित्रा नंदन पन्त की यह रचना मैंने तब पढ़ी थी जब मै कक्षा नौ का छात्र था .....मुझे यह रचना बेहद पसंद थी

......चींटी


वह सरल, विरल, काली रेखा
तम के तागे सी जो हिल-डुल,
चलती लघु पद पल-पल मिल-जुल,
यह है पिपीलिका पाँति! देखो ना, किस भाँति
काम करती वह सतत, कन-कन कनके चुनती अविरत।

गाय चराती, धूप खिलाती,
बच्चों की निगरानी करती
लड़ती, अरि से तनिक न डरती,
दल के दल सेना संवारती,
घर-आँगन, जनपथ बुहारती।

चींटी है प्राणी सामाजिक,
वह श्रमजीवी, वह सुनागरिक।
देखा चींटी को?
उसके जी को?
भूरे बालों की सी कतरन,
छुपा नहीं उसका छोटापन,
वह समस्त पृथ्वी पर निर्भर
विचरण करती, श्रम में तन्मय
वह जीवन की तिनगी अक्षय।

वह भी क्या देही है, तिल-सी?
प्राणों की रिलमिल झिलमिल-सी।
दिनभर में वह मीलों चलती,
अथक कार्य से कभी न टलती।

साभार : श्री सुमित्रानंदन पंत जी

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